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Sunday, February 17, 2013

भजन

साँवरा आओ तो खरी जी मोहन आओ तो खरी।
माधु रे मिन्दर में मीरां एकली खङी।

थे केवो तो साँवरा म्है मोर मुकुट बण जाऊं।
पैरण लागो साँवरा थारै सिर पर ई रम जाऊं।

थे केवो तो साँवरा म्है जळ जमना बण जाऊं।
नहावण लागो साँवरा थारै अंग-अंग रम जाऊं।

थे केवो तो साँवरा म्है हिवङे हार बण जाऊं।
पैरण लागो साँवरा थारै हिवङै में रम जाऊं।

थे केवो तो साँवरा म्है काजळीयो बण जाऊं।
काजळ काडो साँवरा थारै नैणां में रम जाऊं।

थे केवो तो साँवरा म्है बाँसुरङी बण जाऊं।
बंसी बजाओ साँवरा थारै होठां में रम जाऊं।

मीरां हर री लाडली, है बचनां री साची।
गोपीयां रै स्याम आगै बाँध घुघरा नाची।

साँवरा आओ तो खरी जी मोहन आओ तो खरी।
माधु रे मिन्दर में मीरां एकली खङी।                  

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