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Sunday, February 17, 2013

Just a minute sir इसे मत पढ़ना

भाई साहब!आपसे हाथ जोड़कर एक प्रार्थना है कि मैंने जो लिखा है उसे मत पढ़ना।अब आप कहोगे कि ये कैसे हो सकता है! क्या कोई लेखक अपनी लिखी हुई रचना को भी पाठक को पढ़ने से मना कर सकता है भला?लेकिन क्या करूं ऐसा ही है इसलिए आप मेरी मज़बूरी को समझिए और इसे मत पढ़ें|अरे साहब! मैं आपसे ही कह रहा हूँ कि इसे पढ़कर कुछ हाथ नहीं लगेगा।कमाल है आप तो बड़े "वो" हैं रुकते ही नहीं। ये लो आप को तो रोकने का कोई फायदा ही नहीं है।मैं रोकता रहा और आप पढ़ते ही चले गए। तो जनाब अब आप ही बताइए इसे पढ़कर कुछ् हाथ लगा क्या!! वैसे इस रचना को पढ़ने और एन्जॉय करने के लिए धन्यवाद प्यार बनाएं रखें,जय हिंद।जय हिंद!! मतलब ये पूरा हो गया।

-हरीश हैरी,बहलोलनगर।

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